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ज्योतिष तत्व पुस्तक || Jyotish Tattva book pdf download

प्राचीनकाल से ही मनुष्य को अपने शुभाशुभ भविष्य को जानने की जिज्ञासा रही है। उसकी इसी प्रवृत्ति ने ज्योतिष विद्या को जन्म दिया । वास्तव में ज्योतिष शास्त्र एक वैज्ञानिक प्रक्रिया है, जो ईश्वरीय एवं शुद्ध प्राकृतिक नियमों पर आधारित है। प्राचीन मनीषियों ने अपनी दिव्य ज्ञान चक्षुओं, सतत साधना द्वारा ग्रह-नक्षत्रों की प्रकृति एवं प्रभाव का गहन अनुशीलन किया। जिसके फलस्वरूप हमें गणित एवं फलित ज्योतिष के सिद्धान्त प्राप्त हुए। ज्योतिष शास्त्र भूत, भविष्य और वर्तमान की साकार कहानी है। ज्योतिष एक प्राचीन विद्या है। यह हमारे जीवन का एक महत्वपूर्ण पहलू है - हमारा अतीत, वर्तमान और भविष्य।काफी हद तक, ज्योतिष का उपयोग भविष्य की घटनाओं की भविष्यवाणी और भविष्यवाणी करने के लिए किया जाता है और इसे ग्रहों की स्थिति से संबंधित किसी भी प्रकार की दुर्घटना से छुटकारा पाने के लिए एक माध्यम के रूप में भी इस्तेमाल किया जा सकता है।यह अवधारणा कि सौर मंडल में ग्रह पिंड वास्तव में भविष्य की दृष्टि प्रदान कर सकते हैं, लोगों को बहुत लंबे समय से आकर्षित कर रहे हैं।ज्योतिष के साथ हमारी रुचि एक समाचार पत्र के राशि चिन्ह ...

कंकालमालिनी तंत्र पुस्तक || Kankaal Maalini Tantra pdf download

  नमस्कार मित्रो आज की पोस्ट में हम इस पोस्ट में आप सभी को कंकालमालिनी तंत्र पुस्तक उपलब्ध करा रहें हैं। देखिए कंकाल शब्द से अस्थिपंजर का तात्पर्य ध्वनित होता है, तथापि यहाँ उसका अर्थ है मुण्ड-गरमुण्ड ! जिनको ग्रीवा नरमुण्ड माला से सुशोभित हैं, ये हैं की जो मुण्डमाला है, यही है वर्णमाला, अर्थात् जिन्होंने वर्ण की माला को अपनी ग्रीवा में धारण किया है, वे हैं कंकालमालिनी । इस तंत्र के प्रथम पटक में वर्णमाल की व्याख्या अंकित है। इस तंत्र के अनुसार अ से अः पर्यन्त स्वर वर्ण सत्वमय है क से व पर्यन्त वर्णसमूह को रजोमय तथा दक्ष पर्यन्त के वर्णसमूह को तमोगय कहा गया है। द्वितीय पद में मन्त्रार्थयत आदि का अंकन है। तृतीय पटल गुरु अर्चना से सम्बद्ध है। इसमें अमित फलप्रदायक रुगु-कवच गुरु तथा गोता का भी समावेस है । गुरुतत्व की महनीयता से यह पटल ओतप्रोत है । चतुर्थ पटल में महाकाली मंत्र एवं उसके माहात्म्य का अंकन है। इसमें क्षर मंत्र भी उपदिष्ट है। साथ हो महाकाली की सम्यक पूजाविधि का भो निर्देश दिया गया है। पंचम पटल महाकाली के अनन्य कों के लिये हितकारी है। इसमें पुरश्चरण विधान प्रातः कृत्य, स्नान...

गौरी काञ्चलिकातन्त्र पुस्तक || Gaurikanchalika Tantra pdf

नमस्कार मित्रो आपका हमारे ब्लॉग श्री राम परिवार में हार्दिक स्वागत है। मित्रों तन्त्र शब्द अनेक अर्थ हैं जो शास्त्र पुराण इतिहास आदि में स्पष्ट विदित होते हैं परन्तु ' तन्त्र' शब्द सुनते ही बुद्धि में श्रीशिवशिवासंवादरूप तन्त्र शास्त्र का बोध होने लगता है । यह ' गौरीकाञ्चलिकातन्त्र 'शिवशिवासंवाद होने पर भी उससे कुछ विलक्षण है । इसमें श्री भवानी जी ने भगवान शंकर से लोकोपकार की बुद्धि से मनुष्यों को रोग, शोक और मृत्युके भयसे बचाने के लिये प्रश्न किया है, उसके उत्तर में श्रीशंकर जी ने भी ज्वरादि रोगों पर नाना प्रकार के कल्प कहे हैं, यद्यपि कन्द, मूल, वनस्पति आदियों में नाना प्रकारकी शक्ति स्वतः सिद्ध है और उनके प्रयोग से लाभ भी होता है, परन्तु तिथि, नक्षत्र, बार, ऋतु इत्यादि के नियम से उनका खनना उखाडना, इत्यादि क्रिया से उनमें विशेष बल आ जाता है और वो बहुत ज्यादा प्रभावी और शक्तिशाली हो जाती है। जैसा शरद और हेमन्त में वृक्षोंकी छाल और जड को लेना, · शिशिर में फल बसन्त में फूल और पत्ती इत्यादि यह शरीर रक्षणका अच्छा उपाय है। इन सब बातोंको कहकर महादेव ने न जाने कितने ही उपाय इ...

Vishva ki alokik Sadhna book pdf

'मंत्र-तंत्र-यंत्र विज्ञान से संबंधित प्रकाशित होने वाली विश्व की अलौकिक साधनाओं से सम्बन्धित यह अद्वितीय पुस्तक आपके हाथों में है। यह पुस्तक जन साधारण के लिए अत्यन्त महत्वपूर्ण और सहायक है। एक प्रकार से देखा जाय तो यह साधनाओं का खजाना है और इस ग्रंथ का प्रत्येक शब्द साधकों के लिए वरदान स्वरूप है। इसमें साधनाओं की सूक्ष्मता, गोपनीय बारीकियां और सिद्धियां प्राप्त करने हेतु विस्तार से क्रमबद्ध रूप से समझाया गया है। इसमें हर प्रकार के दुर्लभ ज्ञान को जिस सहज और सरल भाषा में प्रस्तुत किया गया है, वह अपने आप में सराहनीय है और इसके माध्यम से साधक साधनाओं के क्षेत्र में पूर्ण सफलता की ओर अग्रसर हो सकेंगे, सिद्धियां प्राप्त कर सकेंगे और जीवन में पूर्णता प्राप्त हो सकेगी। Vishva ki alokik Sadhna साधना के पथ पर न तो कोई पुरुष होता है और न कोई स्त्री, वह एक सम्पूर्ण साधक होता है और फिर साधना की यात्रा शून्य से आरम्भ होकर पूर्णता प्राप्ति तक पहुंचती है, क्योंकि उसका अंतिम पड़ाव साधना की पूर्णता है। इसमें ऐसी साधनाएं हैं, जिन्हें सामान्य गृहस्थ स्त्री-पुरुष कोई भी सम्पन्न कर सकता है, उसे न बहुत...

Hanuman Siddhi PDF download.

॥ॐ हनुमते नमः मनोजवं मारुततुल्यवेगं जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम् वातात्मजं वानरयूथमुख्यं श्री रामदूतं शरणं प्रपये स्वामी से बड़ा सेवक और भगवान से कहीं अधिक भक्त की महिमा और प्रभाव होता है इस तथ्य का सर्वाधिक उपयुक्त उदाहरण भगवान श्री रामचंद्र जी के परम प्रिय भक्त और अनन्य सेवक महावीर हनुमान से बेहतर कहीं नहीं मिल सकता है कलियुग के देवता के रूप में सर्व पूज्य और शीघ्र ही भक्तों पर प्रसन्न हो जाने वाले बजरंगबली की बुद्धि, चातुर्य, विद्या, अतुलित बल पराक्रम, शक्ति और सिद्धियों के समक्ष सारा जगत शीश नवाता है। मित्रों अजर-अमर, अखण्ड चारी, पवन पुत्र रूद्रावतार, अंजनि नंदन इत्यादि विभिन्न नामों से प्रसिद्ध प्रबल वीर और पराक्रमी श्री हनुमान जी की महिमा सर्वविदित है कलियुग में हनुमान जी सर्वाधिक शक्तिशाली उपास्य देव हैं ये शक्ति के महासागर और साहस के प्रतीक हैं। आजन्म ब्रह्मचारी श्री हनुमान जी वानर वंश के होते हुए भी सर्व समर्थ देव हैं। इन्हें भगवान भोलेनाथ शिवशंकर काही अंशावतार माना गया है। श्री हनुमान जी वेदवेदांग ज्योतिष, योग, व्याकरण, तंत्र-मंत्र-यंत्र, संगीत, आध्यात्म और मल्लविद्या के ...

रावण संहिता पुस्तक pdf || Ravan Samhita PDF download

वह राक्षस था—रक्ष संस्कृति का रक्षक... विश्व को जीतना चाहता था वह! देव उसके बंदी थे, उसने अपने बाहुबल से तीनों लोकों पर विजय पा ली थी। वह परम विद्वान था... ज्ञाता था अंग- उपांगों सहित चारों वेदों का। फिर भी दुष्कर्मों में प्रवृत्त हुआ। अभिमान ने भटका दिया उसे या फिर जब विजय की मूर्च्छा टूटी तब तक काफी आगे बढ़ चुका था वह- पीछे जाना असंभव था। राम के हाथों मृत्यु को वरण किया—यह समझदारी थी उसकी। शस्त्र-शास्त्र ज्ञाता लंकाधिपति रावण के जीवन में उतार-चढ़ाव की अनूठी गाथा है इस ग्रंथ में। शिवोपासक दशकंधर, अजेय, राक्षसराज, महान योद्धा, वेदांतविग्रह, लंकाधिपति, शासक, देव-मुनि विरोधी, मायावी, तंत्र-मंत्र के परम ज्ञाता, औषध विज्ञान के रहस्यों के जानकार, दैवज्ञ रावण के जीवन के कुछ अनछुए पहलुओं की झलक । रावण ऋषि पुत्र था। वह पुलस्त्य का पोता था और विश्रवा का पुत्र । उसकी मां राक्षसराज सुमाली की बेटी थी। राक्षस गुह्य विद्याओं के जानकार थे। वे जानते थे कि ऋषि वीर्य को किस विशिष्ट काल में धारण कराने पर राक्षसों के हितों का साधक जन्म लेगा। उसी समय कैकसी ने विश्रवा से प्रणय-याचना की थी। रावण और कुंभकर्ण ...

10 महाविद्या साधना पुस्तक PDF

तंत्र की महाशक्तियां 10 महाविद्या Book Pdf. (Shree Ram Pariwar) नमस्कार मित्रों इस पोस्ट मे आप सभी को 10 महाविद्या के मंत्र था उनके लाभ और साथ ही 10 महाविद्या की पुस्तक pdf प्रदान कर रहे है। इसलिए आप इस पूरी पोस्ट को ध्यान से पढ़े जिससे आपको सारी जानकारी प्राप्त हो सके। देखिए मित्रों 10 महाविद्या की पूजा गुप्त रूप से गुप्त नवरात्रों में की जाती (Das Mahavidya Beej Mantra) हैं। तभी इन्हें गुप्त नवरात्र की संज्ञा दी गयी हैं। महाविद्याओं की पूजा मुख्य रूप से तांत्रिक विद्या व शक्तियां अर्जित करने के उद्देश्य से की जाती हैं तो वही सामान्य भक्तगण माँ के गुणों को धारण करने के लिए उनकी पूजा करते (Dus Mahavidya Mantra) हैं। इसलिए आज हम आपको दस महाविद्या बीज मंत्र व उनसे मिलने वाले लाभ के बारे में (10 Mahavidya Mantra In Hindi) बताएँगे ताकि आप मातारानी के महाविद्या रूप का महत्व जान सके। दस महाविद्या बीज मंत्र व उसके लाभ (Das Mahavidya Mantra) 1. काली मंत्र (Kali Mantra) ॐ क्रीं क्रीं क्रीं हूँ हूँ ह्रीं ह्रीं दक्षिणे कालिका क्रीं क्रीं क्रीं हूँ हूँ ह्रीं ह्रीं स्वाहा।। काली बीज मंत्र लाभ (Kali...

असली छापे का पुराना इंद्रजाल PDF

नमस्कार मित्रों आप में से बहुत सारे सदस्य असली छापे का पुराना इंद्रजाल प्राप्त करना चाहते थे। इसलिए हम आज आपको इस पोस्ट के माध्यम से असली पुराने छापे का इंद्रजाल उपलब्ध करवा रहे है। देखिए इंद्रजाल तंत्र मंत्र का एक अद्भुत संग्रह है। इस के अंदर आपको तंत्र के सभी प्रकार के मंत्र और प्रयोग देखने को मिल जाते है। इस पुस्तक में हर प्रकार का तंत्र प्रयोग है जिसके माध्यम से आप कुछ भी कर सकते है। मुख्य रूप से इसमें षट्कर्म के ऊपर ज्यादा जानकारी दी गई है। इसमें कई सारी प्राचीन जड़ी बूटियों की जानकारी और उनका प्रयोग विधि मिल जाएगा। साथ ही इसमें मंत्रो के द्वारा सभी रोगों के इलाज के बारे में भी जानकारी दी गई है। इसमें कई सारे यंत्रों को बनाने की विधि भी दी गई है। इस पुस्तक में ऐसे बहुत से प्रयोग है जिनके द्वारा किसी का भी अहित हो सकता है या किया जा सकता है। अतः आप सभी से निवेदन है कि आप ऐसे किसी भी प्रयोग को न करे , नही तो आपको उसके लिए बहुत बुरे परिणाम भुगतने पड़ सकते है। साथ ही ये आपके विनाश का कारण बन सकता है। इसलिए ऐसा कभी-भी नही करना चाहिए। देखिए इसमें जो भी जड़ी बूटियों है अगर आप उनका प्रयोग...