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सचित्र आयुर्वेदिक जड़ी बूटियों की पुस्तक || ayurvedic Jadi buti book pdf

आयुर्वेद शब्द का अर्थ क्या है? आयुर्वेद ( = आयुः + वेद ; शाब्दिक अर्थ : 'आयु का वेद' या 'दीर्घायु का विज्ञान' एक मुख्य और सबसे श्रेष्ठ चिकित्सा प्रणाली है जिसकी जड़ें भारतीय उपमहाद्वीप में हैं। भारत, नेपाल और श्रीलंका में आयुर्वेद का अत्यधिक प्रचलन है, जहाँ लगभग 70 प्रतिशत जनसंख्या इसका उपयोग करती है। आयुर्वेद विश्व की प्राचीनतम चिकित्सा प्रणालियों में से एक है। आयुर्वेद, भारतीय आयुर्विज्ञान है। आयुर्विज्ञान, विज्ञान की वह शाखा है जिसका सम्बन्ध मानव शरीर को निरोग रखने, रोग हो जाने पर रोग से मुक्त करने अथवा उसका शमन करने तथा आयु बढ़ाने से है। आयुर्वेद के अंग धन्वन्तरि आयुर्वेद के देवता हैं। वे विष्णु के अवतार माने जाते हैं। हिताहितं सुखं दुःखमायुस्तस्य हिताहितम्। मानं च तच्च यत्रोक्तमायुर्वेदः स उच्यते॥  आयुर्वेद के ग्रन्थ तीन शारीरिक दोषों (त्रिदोष = वात, पित्त, कफ) के असंतुलन को रोग का कारण मानते हैं और समदोष की स्थिति को आरोग्य।  आयुर्वेद को त्रिस्कन्ध (तीन कन्धों वाला) अथवा त्रिसूत्र भी कहा जाता है, ये तीन स्कन्ध अथवा त्रिसूत्र हैं - हेतु , लिंग , औषध।  इसी प्रकार स...

महाशक्तिशाली टोने टोटके की पुस्तक || Mahashktishali tone totake ki pustak

Mahashktishali tone totake ki pustak भारत को देवभूमि कहा गया है- क्योंकि यहां समय-समय पर देवताओं ने मानव कल्याण के लिए अवतार लिया। यही वह पावन भूमि है जहां मंत्रों के उच्चारण हमारे मन को बहुत शान्ति पहुंचाते हैं। परंतु फिर भी जब भी मंत्रों से संबंधित कभी बात उठती है तो मन में अजीब सा भय उत्पन्न होता है कि कहीं यह मंत्र व टोटके हमारे जीवन को कुछ का कुछ (अहित) न कर दें। मंत्रों और टोटकों के इसी भय एवं इनसे संबंधित अधूरी जानकारी और अंधविश्वास को आध्यात्मिक एवं मनोवैज्ञानिक ढंग से आपके सामने प्रस्तुत करने का एक माध्यम है मेरी यह पुस्तक कहते हैं कि टोटकों-टोनों में शक्ति होती है, लेकिन यह शक्ति कैसे काम करती है, किस क्षेत्र में, किस सीमा तक उपयोगी है, तथा मंत्रों टोटकों के प्रयोग से क्या क्या संभव है, इन्हीं सब को उजागर करती है यह पुस्तक! इसलिए क्या हैं मंत्र? कैसे, कब, क्यों व कहां करें इनका उपयोग? कैसे इनकी मदद से जीवन को लाभ प्रदान किया जा सकता है। जानिए इस पुस्तक में! कहते हैं कि समय से पहले एवं भाग्य से अधिक कभी कुछ नहीं मिलता। इस परिवर्तनशील संसार में सब खेल समय का है। समय अच्छा है तो...

पतंजलि योग दर्शन पुस्तक PDF बिल्कुल फ्री || Patanjali yog Darshan book pdf

पतंजलि प्राचीन भारत के एक मुनि और नागों के राजा शेषनाग के अवतार थे जिन्हे संस्कृत के अनेक महत्वपूर्ण ग्रन्थों का रचयिता माना जाता है। इनमें से योगसूत्र उनकी महानतम रचना है जो योगदर्शन का मूलग्रन्थ है। भारतीय साहित्य में पतंजलि द्वारा रचित ३ मुख्य ग्रन्थ मिलते हैं। योगसूत्र, अष्टाध्यायी पर भाष्य और आयुर्वेद पर ग्रन्थ। पतंजलि महान चिकित्सक थे और इन्हें ही 'चरक संहिता' का प्रणेता माना जाता है। 'योगसूत्र' पतंजलि का महान अवदान है। पतंजलि रसायन विद्या के विशिष्ट आचार्य थे अभ्रक विंदास, अनेक धातुयोग और लौहशास्त्र इनकी देन है। पतंजलि संभवत पुष्यमित्र शुंग (१९५-१४२ ई.पू.) के शासनकाल में थे। राजा भोज ने इन्हें तन के साथ मन का भी चिकित्सक कहा है। योगसूत्र, योग दर्शन का मूल ग्रंथ है। यह छः दर्शनों में से एक शास्त्र है और योगशास्त्र का एक ग्रंथ है। योगसूत्रों की रचना ३००० साल के पहले पतंजलि ने की। इसके लिए पहले से इस विषय में विद्यमान सामग्री का भी इसमें उपयोग किया। योगसूत्र में चित्त को एकाग्र करके ईश्वर में लीन करने का विधान है। पतंजलि के अनुसार चित्त की वृत्तियों को चंचल होने से ...

महापुराण महाभारत की PDF पुस्तक || Mahabharat PDF download

महाभारत आर्य संस्कृति तथा भारतीय सनातन धर्म का एक अत्यन्त आदरणीय और महान् प्रमुख ग्रन्थ है । यह अनन्त अमूल्य रत्नोंका अपार भण्डार है भगवान् वेदव्यास स्वयं कहते हैं कि 'इस महाभारत में मैंने वेदोंके रहस्य और विस्तार, उपनिषदों के सम्पूर्ण सार, इतिहास-पुराणों के उन्मेष और निमेष, चातुर्वर्ण्य- के विधान, पुराणों के आशय ग्रह-नक्षत्र तारा आदिके परिमाण, न्याय, शिक्षा, चिकित्सा, दान, पाशुपत ( अन्तर्यामीकी महिमा ), तीर्थों, पुण्य देशों, नदियों, पर्वतों, वनों तथा समुद्रोंका भी वर्णन किया है ।' अतएव महाभारत महाकाव्य है, गुढ़ार्थमय ज्ञान-विज्ञान - शास्त्र हैं, धर्मग्रन्थ है। राजनीतिक दर्शन है, निष्काम कर्मयोग-दर्शन है, भक्ति-शास्त्र है, अध्यात्म-शास्त्र है, आर्यजातिका इतिहास है और सर्वार्थसाधक तथा सर्वशास्त्रसंग्रह है।  सबसे अधिक महत्त्वकी बात तो यह है कि इसमें एक, अद्वितीय, सर्वज्ञ, सर्वशक्ति- मान् सर्वलोकमहेश्वर, परमयोगेश्वर, अचिन्त्यानन्त गुणगणसम्पन्नः सृष्टि-स्थिति प्रलयकारी विचित्र लीलाविहारी, भक्त-भक्तिमान्, भक्त-सर्वख, निखिलरसामृतसिन्धु अनन्तप्रेमाधार, प्रेमघनविग्रह, सच्चिदानन्दघन, व...

विष्णु पुराण PDF Download || Vishnu Purana book pdf download

विष्णुपुराण अट्ठारह पुराणों में अत्यन्त महत्त्वपूर्ण तथा प्राचीन है। यह श्री पराशर ऋषि द्वारा प्रणीत है। इसके प्रतिपाद्य भगवान विष्णु हैं, जो सृष्टि के आदिकारण, नित्य, अक्षय, अव्यय तथा एकरस हैं। इस पुराण में आकाश आदि भूतों का परिमाण, समुद्र, सूर्य आदि का परिमाण, पर्वत, देवतादि की उत्पत्ति, मन्वन्तर, कल्प-विभाग, सम्पूर्ण धर्म एवं देवर्षि तथा राजर्षियों के चरित्र का विशद वर्णन है। भगवान विष्णु प्रधान होने के बाद भी यह पुराण विष्णु और शिव के अभिन्नता का प्रतिपादक है। विष्णु पुराण में मुख्य रूप से श्रीकृष्ण चरित्र का वर्णन है, यद्यपि संक्षेप में राम कथा का उल्लेख भी प्राप्त होता है। अष्टादश महापुराणों में श्री विष्णुपुराण का स्थान बहुत ऊँचा है। इसमें अन्य विषयों के साथ भूगोल, ज्योतिष, कर्मकाण्ड, राजवंश और श्रीकृष्ण-चरित्र आदि कई प्रंसगों का बड़ा ही अनूठा और विशद वर्णन किया गया है। श्री विष्णु पुराण में भी इस ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति, वर्ण व्यवस्था, आश्रम व्यवस्था, भगवान विष्णु एवं माता लक्ष्मी की सर्वव्यापकता, ध्रुव प्रह्लाद, वेनु, आदि राजाओं के वर्णन एवं उनकी जीवन गाथा, विकास की परम्परा, क...

श्री हनुमान-अंक || Hanuman Anka PDF download

प्राचीन भारतके ऋषि महर्षि अत्यन्त उच्चकोटिके ज्ञानी, भक्त और परोपकारी संत थे। उन्होंने लोक-कल्याणके लिये अपने भगवदीय ज्ञान का मुक्त हृदय से प्रचार-प्रसार किया। जगदात्मा भगवान् एक ही हैं, फिर भी शिव, विष्णु, शक्ति, सूर्य, गणेश, स्कंद तथा विष्णुके राम, कृष्ण, वामन, नृसिंह, मत्स्य, कूर्म आदि अवतारोंके नामपर उन्होंने पुराणों तथा उपासना प्रन्थोंकी रचना कर विभिन्न रुचिके प्राणियोंको उस एक ही परमात्माकी प्राप्तिकी ओर प्रेरित किया।  हनुमान जी पर वेद, पुराण, रामायण, महाभारत और तुलसी साहित्य में प्रचुर सामग्री प्राप्त होती है। तन्त्र- साहित्य में उनकी उपासना के चमत्कारिक प्रभाव निर्दिष्ट हुए हैं और हनुमत् उपासना, कल्पद्रुम आदि कई स्वतन्त्र ग्रन्थ भी हैं। मन्त्रमहोदधि, मन्त्रमहार्णव आदिमें उनकी अनेक उपासना-विधियाँ हैं। इन सबोंके आधारपर विद्वानोंने बहुत अच्छे लेख लिखे। वेदाचार्य गंगेश्वरानन्दजी महाराजने कुछ वैदिक मन्त्रोंका हनुमान्परक इतना सुन्दर अर्थ दिखलाया, जिसे पढ़कर यही लगा कि वास्तव मे उसके पद, अक्षर सब रामायण के उन्हीं अर्थों को व्यक्त करते हैं जो हनुमान्परक हैं। इसीलिये प्राचीन विद्वान...

मातङ्गी महाविद्या पुस्तक || Matangi Mahavidya book pdf download

गुप्त नवरात्रि की नौवीं महाविद्या मातंगी है।  मातंगी देवी प्रकृति की देवी हैं। कला संगीत की देवी हैं। तंत्र की देवी हैं। वचन की देवी हैं। यह एकमात्र ऐसी देवी हैं जिनके लिए व्रत नहीं रखा जाता है। यह केवल मन और वचन से ही तृप्त हो जाती हैं। भगवान शंकर और पार्वती के भोज्य की शक्ति के रूप में मातंगी देवी का ध्यान किया जाता है। मातंगी देवी को किसी भी प्रकार के इंद्रजाल और जा को काटने की शक्ति प्रदत्त है।  देवी मातंगी का स्वरूप मंगलका है वह विद्या और वाणी की अधिष्ठात्री है पशु, पक्षी, जंगल, आदि प्राकृतिक तत्वों में उनका वास होता है वह दस महाविद्याओं में नौवें स्थान पर हैं। मातंगी देवी श्री लक्ष्मी का ही स्वरूप हैं। नवरात्रि में जहां नवां स्थान मां सिद्धिदात्री को प्राप्त है, वहां गुप्त नवरात्रि की नौवां स्थान देवी मातंगी को प्राप्त है। स्वरूप दोनों ही श्रीलक्ष्मी के हैं। मतंग मुनि की पुत्री हैं मातंगी एक बार भगवान विष्णु और उनकी पत्नी लक्ष्मी जी, भगवान शिव तथा पार्वती से मिलने हेतु उनके निवास स्थान कैलाश शिखर पर गए। भगवान विष्णु अपने साथ कुछ खाने की सामग्री ले गए और शिव जी को भेट किए...

असली कोका शास्त्र || Asali koka Shastra pdf download

असली कोकशास्त्र  ki  story. (Shree Ram Pariwar) जैसे महत्वपूर्ण कोकशास्त्र ग्रन्थ के रचयिता- कोकापंडित का संक्षिप्त जीवन किसी समय काश्मीर देश में महाराज शान्तिदेव राज्य करते थे । उनकी न्याय-प्रियता और प्रजा वात्सल्य के कारण प्रजा उन्हें पिता के समान स्नेह करती थी । प्रजा का ऐसा स्नेह देखकर पुत्र- विहीन होने पर भी उन्हें वृद्धावस्था में पुत्राभाव के दुःख का अनु- भव नहीं होता था । ठोक वैसे ही उनके प्रधान मन्त्री पं० दीनानाथ जी थे । जो अनुभवी और बुद्धिमान व्यक्ति थे वे महाराज के समवयस्क और 1 परम स्नेही थे । प्रजा की देख-रेख का भार प्रायः उन्हीं पर था । प्रजा भी उन्हें जी-जान से प्यार करती थी । दैव-दुर्विपाक से इनके भी कोई सन्तान न थी । एक दिन महाराज ओर प्रधान मन्त्री काश्मीरी पर्वतों पर भ्रमण करने के लिये गये थे। काश्मीर देश ऐसा सुन्दर पहाड़ियों से घिरा हुआ है, जो दुर्ग की प्राचीर की भाँति उसे चारो ओर से घेरे हुए हैं उन पहाड़ियों पर अंगूर, फालसा, अखरोट, बादाम आदि अनेक प्रकार के मेवे हर समय, मौसिम के लिहाज से लदे रहते हैं। कन्द-फल-फूल की तो गिनती ही नहीं। ऐसा हरा-भरा प्रदेश भू-मण्...