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शाबर मंत्र संग्रह भाग 9 Shabar Mantra Sangraha part-9 pdf download

शाबर मंत्र संग्रह भाग 9 जानकारी पुस्तक का नाम शाबर मंत्र संग्रह भाग 9 साइज 19.56 Mb प्रदानकर्ता श्र राम परिवार लेखक - प्रष्ठ 162 प्रकाशन कल्याण मन्दिर प्रकाशन, इलाहाबाद YouTube channel plz subscribe नमस्कार मित्रों,  श्री राम परिवार (Shree Ram Pariwar) में आपका हार्दिक स्वागत करता है। इस पोस्ट में हमने आप सभी को शाबर मंत्र संग्रह भाग 8 उपलब्ध करवाया है। हमने आपको पहले भी शाबर मंत्र संग्रह के पाँच भाग उपलब्ध करवा दिए हैं। उनको आप प्राप्त कर सकते हैं, उनकी लिंक में नीचे दे दूंगा। शाबर मंत्र संग्रह भाग 5 free Pdf शाबर मंत्र संग्रह भाग 4 शाबर मंत्र संग्र भाग-३ शाबर मंत्र संग्रह का भाग 2   शाबर मंत्र संग्रह का भाग 1...

कुंडलिनी जागरण पुस्तक Kundalini Jagaran pdf download free

योग सिद्धांत के अनुसार प्रत्येक मनुष्य के मेरुदंड के नीचे एक ऊर्जा संग्रहीत होती है जिसके जाग्रत होने पर आत्मज्ञान की प्राप्ति होती है।दिव्यांशु पाठक के अनुसार कुण्डलिनी महाशक्ति दिव्य ऋतम्भरा प्रज्ञा प्रदान करती है साथ ही यह योगीयों के लिए आदिशक्ति हैं। इसका ज़िक्र उपनिषदों और शाक्त विचारधारा के अन्दर कई बार आया है। ऊर्जा का यह रूप (क्वाईल या कुंडली) एक सांप के साढ़े तीन कुंडली (लपेटे हुए) मारकर बैठे हुए है। कुंडलिनी एक दिव्य शक्ति है जो सर्प की तरह साढ़े तीन फेरे लेकर शरीर के सबसे नीचे के चक्र मूलाधार में स्थित है। जब तक यह इस प्रकार नीचे रहती है तब तक व्यक्ति सांसारिक विषयों की ओर भागता रहता है। परन्तु जब यह जाग्रत होती है तो ऐसा प्रतीत होने लगता है कि कोई सर्पिलाकार तरंग है जो घूमती हुई ऊपर उठ रही है। यह बड़ा ही दिव्य अनुभव होता है।    हमारे शरीर में सात चक्र होते हैं। कुंडलिनी का एक छोर मूलाधार चक्र पर है और दूसरा छोर रीढ़ की हड्डी के चारों तरफ लिपटा हुआ जब ऊपर की ओर गति करता है तो उसका उद्देश्य सातवें चक्र सहस्रार तक पहुंचना होता है, लेकिन यदि व्यक्ति संयम और ध्यान छोड़ ...

सचित्र आयुर्वेदिक जड़ी बूटियों की पुस्तक || ayurvedic Jadi buti book pdf

आयुर्वेद शब्द का अर्थ क्या है? आयुर्वेद ( = आयुः + वेद ; शाब्दिक अर्थ : 'आयु का वेद' या 'दीर्घायु का विज्ञान' एक मुख्य और सबसे श्रेष्ठ चिकित्सा प्रणाली है जिसकी जड़ें भारतीय उपमहाद्वीप में हैं। भारत, नेपाल और श्रीलंका में आयुर्वेद का अत्यधिक प्रचलन है, जहाँ लगभग 70 प्रतिशत जनसंख्या इसका उपयोग करती है। आयुर्वेद विश्व की प्राचीनतम चिकित्सा प्रणालियों में से एक है। आयुर्वेद, भारतीय आयुर्विज्ञान है। आयुर्विज्ञान, विज्ञान की वह शाखा है जिसका सम्बन्ध मानव शरीर को निरोग रखने, रोग हो जाने पर रोग से मुक्त करने अथवा उसका शमन करने तथा आयु बढ़ाने से है। आयुर्वेद के अंग धन्वन्तरि आयुर्वेद के देवता हैं। वे विष्णु के अवतार माने जाते हैं। हिताहितं सुखं दुःखमायुस्तस्य हिताहितम्। मानं च तच्च यत्रोक्तमायुर्वेदः स उच्यते॥  आयुर्वेद के ग्रन्थ तीन शारीरिक दोषों (त्रिदोष = वात, पित्त, कफ) के असंतुलन को रोग का कारण मानते हैं और समदोष की स्थिति को आरोग्य।  आयुर्वेद को त्रिस्कन्ध (तीन कन्धों वाला) अथवा त्रिसूत्र भी कहा जाता है, ये तीन स्कन्ध अथवा त्रिसूत्र हैं - हेतु , लिंग , औषध।  इसी प्रकार स...

महाशक्तिशाली टोने टोटके की पुस्तक || Mahashktishali tone totake ki pustak

Mahashktishali tone totake ki pustak भारत को देवभूमि कहा गया है- क्योंकि यहां समय-समय पर देवताओं ने मानव कल्याण के लिए अवतार लिया। यही वह पावन भूमि है जहां मंत्रों के उच्चारण हमारे मन को बहुत शान्ति पहुंचाते हैं। परंतु फिर भी जब भी मंत्रों से संबंधित कभी बात उठती है तो मन में अजीब सा भय उत्पन्न होता है कि कहीं यह मंत्र व टोटके हमारे जीवन को कुछ का कुछ (अहित) न कर दें। मंत्रों और टोटकों के इसी भय एवं इनसे संबंधित अधूरी जानकारी और अंधविश्वास को आध्यात्मिक एवं मनोवैज्ञानिक ढंग से आपके सामने प्रस्तुत करने का एक माध्यम है मेरी यह पुस्तक कहते हैं कि टोटकों-टोनों में शक्ति होती है, लेकिन यह शक्ति कैसे काम करती है, किस क्षेत्र में, किस सीमा तक उपयोगी है, तथा मंत्रों टोटकों के प्रयोग से क्या क्या संभव है, इन्हीं सब को उजागर करती है यह पुस्तक! इसलिए क्या हैं मंत्र? कैसे, कब, क्यों व कहां करें इनका उपयोग? कैसे इनकी मदद से जीवन को लाभ प्रदान किया जा सकता है। जानिए इस पुस्तक में! कहते हैं कि समय से पहले एवं भाग्य से अधिक कभी कुछ नहीं मिलता। इस परिवर्तनशील संसार में सब खेल समय का है। समय अच्छा है तो...

पतंजलि योग दर्शन पुस्तक PDF बिल्कुल फ्री || Patanjali yog Darshan book pdf

पतंजलि प्राचीन भारत के एक मुनि और नागों के राजा शेषनाग के अवतार थे जिन्हे संस्कृत के अनेक महत्वपूर्ण ग्रन्थों का रचयिता माना जाता है। इनमें से योगसूत्र उनकी महानतम रचना है जो योगदर्शन का मूलग्रन्थ है। भारतीय साहित्य में पतंजलि द्वारा रचित ३ मुख्य ग्रन्थ मिलते हैं। योगसूत्र, अष्टाध्यायी पर भाष्य और आयुर्वेद पर ग्रन्थ। पतंजलि महान चिकित्सक थे और इन्हें ही 'चरक संहिता' का प्रणेता माना जाता है। 'योगसूत्र' पतंजलि का महान अवदान है। पतंजलि रसायन विद्या के विशिष्ट आचार्य थे अभ्रक विंदास, अनेक धातुयोग और लौहशास्त्र इनकी देन है। पतंजलि संभवत पुष्यमित्र शुंग (१९५-१४२ ई.पू.) के शासनकाल में थे। राजा भोज ने इन्हें तन के साथ मन का भी चिकित्सक कहा है। योगसूत्र, योग दर्शन का मूल ग्रंथ है। यह छः दर्शनों में से एक शास्त्र है और योगशास्त्र का एक ग्रंथ है। योगसूत्रों की रचना ३००० साल के पहले पतंजलि ने की। इसके लिए पहले से इस विषय में विद्यमान सामग्री का भी इसमें उपयोग किया। योगसूत्र में चित्त को एकाग्र करके ईश्वर में लीन करने का विधान है। पतंजलि के अनुसार चित्त की वृत्तियों को चंचल होने से ...

महापुराण महाभारत की PDF पुस्तक || Mahabharat PDF download

महाभारत आर्य संस्कृति तथा भारतीय सनातन धर्म का एक अत्यन्त आदरणीय और महान् प्रमुख ग्रन्थ है । यह अनन्त अमूल्य रत्नोंका अपार भण्डार है भगवान् वेदव्यास स्वयं कहते हैं कि 'इस महाभारत में मैंने वेदोंके रहस्य और विस्तार, उपनिषदों के सम्पूर्ण सार, इतिहास-पुराणों के उन्मेष और निमेष, चातुर्वर्ण्य- के विधान, पुराणों के आशय ग्रह-नक्षत्र तारा आदिके परिमाण, न्याय, शिक्षा, चिकित्सा, दान, पाशुपत ( अन्तर्यामीकी महिमा ), तीर्थों, पुण्य देशों, नदियों, पर्वतों, वनों तथा समुद्रोंका भी वर्णन किया है ।' अतएव महाभारत महाकाव्य है, गुढ़ार्थमय ज्ञान-विज्ञान - शास्त्र हैं, धर्मग्रन्थ है। राजनीतिक दर्शन है, निष्काम कर्मयोग-दर्शन है, भक्ति-शास्त्र है, अध्यात्म-शास्त्र है, आर्यजातिका इतिहास है और सर्वार्थसाधक तथा सर्वशास्त्रसंग्रह है।  सबसे अधिक महत्त्वकी बात तो यह है कि इसमें एक, अद्वितीय, सर्वज्ञ, सर्वशक्ति- मान् सर्वलोकमहेश्वर, परमयोगेश्वर, अचिन्त्यानन्त गुणगणसम्पन्नः सृष्टि-स्थिति प्रलयकारी विचित्र लीलाविहारी, भक्त-भक्तिमान्, भक्त-सर्वख, निखिलरसामृतसिन्धु अनन्तप्रेमाधार, प्रेमघनविग्रह, सच्चिदानन्दघन, व...

विष्णु पुराण PDF Download || Vishnu Purana book pdf download

विष्णुपुराण अट्ठारह पुराणों में अत्यन्त महत्त्वपूर्ण तथा प्राचीन है। यह श्री पराशर ऋषि द्वारा प्रणीत है। इसके प्रतिपाद्य भगवान विष्णु हैं, जो सृष्टि के आदिकारण, नित्य, अक्षय, अव्यय तथा एकरस हैं। इस पुराण में आकाश आदि भूतों का परिमाण, समुद्र, सूर्य आदि का परिमाण, पर्वत, देवतादि की उत्पत्ति, मन्वन्तर, कल्प-विभाग, सम्पूर्ण धर्म एवं देवर्षि तथा राजर्षियों के चरित्र का विशद वर्णन है। भगवान विष्णु प्रधान होने के बाद भी यह पुराण विष्णु और शिव के अभिन्नता का प्रतिपादक है। विष्णु पुराण में मुख्य रूप से श्रीकृष्ण चरित्र का वर्णन है, यद्यपि संक्षेप में राम कथा का उल्लेख भी प्राप्त होता है। अष्टादश महापुराणों में श्री विष्णुपुराण का स्थान बहुत ऊँचा है। इसमें अन्य विषयों के साथ भूगोल, ज्योतिष, कर्मकाण्ड, राजवंश और श्रीकृष्ण-चरित्र आदि कई प्रंसगों का बड़ा ही अनूठा और विशद वर्णन किया गया है। श्री विष्णु पुराण में भी इस ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति, वर्ण व्यवस्था, आश्रम व्यवस्था, भगवान विष्णु एवं माता लक्ष्मी की सर्वव्यापकता, ध्रुव प्रह्लाद, वेनु, आदि राजाओं के वर्णन एवं उनकी जीवन गाथा, विकास की परम्परा, क...