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महाकाली साधना डॉ. नारायण दत्त श्रीमाली जी




नमस्कार मित्रों
 इस पोस्ट में आप सभी को माता काली से संबंधित पुस्तक उपलब्ध करवा रहे हैं।

महाकाली हिन्दू धर्म की एक प्रमुख देवी हैं। यह सुन्दरी रूप वाली भगवती पार्वती का काला(तामसिक) और भयप्रद रूप है, जिसकी उत्पत्ति असुरों के संहार के लिये हुई थी। उनको विशेषतः बंगाल, ओडिशा और असम में पूजा जाता है। काली को शाक्त परम्परा की दस महाविद्याओं में से एक भी माना जाता है। वैष्णो देवी में दाईं पिंडी माता महाकाली की ही है |

काली की व्युत्पत्ति काल अथवा समय से हुई है जो सबको अपना ग्रास बना लेता है। माँ का यह रूप है जो नाश करने वाला है पर यह रूप सिर्फ उनके लिए हैं जो दानवीय प्रकृति के हैं जिनमे कोई दयाभाव नहीं है। यह रूप बुराई से अच्छाई को जीत दिलवाने वाला है अत: माँ काली अच्छे मनुष्यों की शुभेच्छु है और पूजनीय है। इनको महाकाली भी कहते हैं।

माता महाकाली से संबंधित डॉक्टर नारायण दत्त श्रीमाली जी द्वारा लिखित एक पुस्तक हम आपको इस पोस्ट में उपलब्ध करवा रहे हैं जिसका निवेदन निवेदन आप ही में से एक सदस्य ने किया था।

इस पुस्तक में आपको माता महाकाली का स्वरूप उनके पूजन की विधि और साधना की विधि भी देखने को मिलेगी जिससे जो लोग माता की साधना करना चाहते हैं और जो लोग माता की उचित पूजा विधि जानना चाहते हैं वो इस पुस्तक कों प्राप्त कर सकते हैं।

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